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शनिवार, नवंबर 28, 2009

मिर्गी के दोरे पर चंद्रमा की कलाओं प्रभाव होता है(नया शोध)

यह तो सर्वविदित है कि, पूर्ण चंद्रमा के कारण अर्थार्त पूर्णमासी को बहुत बार सागर की लहरों में एक उफान आता है,जिसके कारण सागर की लहरें कई,कई मीटर ऊपर की ओर जातीं हैं, जिसको ज्वार कहतें हैं, इसका वैज्ञानिक कारण है कि इस समय चंद्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति बड़ जाती है,और यह गुरुत्वाकर्षण शक्ति समुन्दर की लहरों को अपनी और आकर्षित करती है,और इसी कारण सागर में ज्वार आता है, और एक विषय यह भी रहा है कि चंद्रमा की कलाओं का प्रभाव मानसिक रोगियों के उन्माद पर पड़ता है |
  यूनिवरसिटी कालेज ऑफ़ लन्दन ने एक हाल ही में एक शोध किया है कि मिर्गी के दोरे अँधेरी रात में सर्वाधिक होता है, इसका आकलन मेलोटिन हारमोन का शरीर में स्राव होने के कारण किया जा रहा है, इस मिलोटिन हारमोन का स्राव अँधेरी रात में सरवाअधिक होता है, इसके लिए मिर्गी के दोरे के रोगियों पर चंद्रमा की किरणों का प्रभाव चोबीस घंटे के लिए देखा गया,और इस मनोवेगाय्निक परिक्षण में यह देखा गया कि, अँधेरी रात में मिर्गी के दोरे सबसे अधिक होतें हैं |
   मेरे एक मानसिक चिकत्सक मित्र मिर्गी के रोगियों और उनके परिजनों को यह सलाह देते थे, कि मिर्गी के रोगी वेल्डिंग के प्रकाश की ओर ना देखें, टुयूब के प्रकाश की ओर सीधी दृष्टि से ना देखें, या और किसी भी प्रकार के तेज कृत्रिम प्रकाश की और सीधी दृष्टि से ना देखें,उस समय तो मुझे यह समझ में नहीं आता था, ऐसा यह मानसिक चिकत्सक क्यों कहते थे, और ना ही मैंने उनसे इस विषय पर पूछा कभी, संभवत: उक्त कारण होगा कि मिर्गी के दोरे वाले रोगी पर इसका प्रभाव पड़ता होगा |
      यह आजकल का नया मनोवेगाय्निक शोध है |

         

2 टिप्‍पणियां:

संगीता पुरी ने कहा…

अच्‍छा लगा आपका आलेख .. वैसे किसी अस्‍पताल में तीन महीने तक के नवजात शिशुओं का वजन के चार्ट पर भी गौर किया जाए .. तो उसमें भी सामान्‍य तौर पर चंद्रमा की कलाओं का प्रभाव दिखेगा .. चंद्रमा तो पृथ्‍वी के बहुत निकट है .. इसके अतिरिक्‍त कला के अनुसार ही इसकी शक्ति घटती बढती है .. इसलिए इसका प्रभाव सब महसूस कर पाते हैं .. दूरस्‍थ ग्रहों की शक्ति को समझना थोडा कठिन है .. ज्‍योतिष के अधिक अध्‍ययन की आवश्‍यकता पडती है .. फिर लंदन और न्‍यूयार्क में रिसर्च करनेवालों को सारी दुनिया मान लेती है .. हमारी कौन माने ??

vinay ने कहा…

धन्यावाद संगीता जी,आप मेरे लिखने की प्रेरणा स्रोत है,आपकी टिप्पणियो से लगता है कि आप मूल विषय को पड़ कर मनन करके टिप्पणीयां देतीं है,नहीं तो में अक्सर दुबिधा में पड़ जाता हूँ,कि अब लिखुं कि नहीं,पर आपकी प्रेरणा के कारण लिखने लगता हूँ ।