"दुनिया बनाने वाले क्या तेरे मन में समाई
काहे तूने दुनिया बनाई
काहे बनाये तुने यह पुतले
क्यों उनको दे दी खुदाई "
यह राजकपूर द्वारा "तीसरी कसम फ़िल्म में गाया हुआ यह गीत मझे भी यदा,कदा विचलित करता है, मेरा भी उस ईश्वर,खुदा,
गोड, परमपिता परमेश्वर से यही प्रश्न है,क्यों तूने इस सृष्टि का निर्माण किया?आप को बहुत से नामों से पुकारा जाता है, हिन्दू धर्म में परमात्मा,ईश्वर, भगवान,आदि,आदि,मुस्लिम धर्म में,खुदा और अल्लाह,और इसाई धर्म में गोड,जिसके बेटे इसा मसीह थे,और मुस्लिम समुदाय के पेगेम्बेर थे मोहम्मद साहब, प्रभु इंसान ने जन्म लिया था,उस समय तो उसका कोई धर्म नहीं था,पर आपके बन्दों ने तो आते ही जाती,धर्म में बटवारा कर दिया,और अलग,अलग जाती और धर्म वाले अपने को एक दूसरे से श्रेष्ठ बताने लगे,है परमपिता यह आपने इंसानों को इस प्रकार की बुद्धि देकर कौन सा खेल रचा था? और है ईश्वर इसी से इंसान का मन नहीं भरा तो,एक ही जाती और धर्म मानने वाले भी तो अपने को एक दूसरे से श्रेष्ठ बताने लगे हैं, हिन्दू धर्म में सगुण,और निर्गुण मर्गियों में आपस में मतभेद,सगुण कहते हैं,सगुण श्रेष्ठ और निर्गुण कहते हैं,निर्गुण श्रेष्ठ,फिर द्वैतवाद और अद्वैतवाद का यही आपस में तर्क है ईश्वर ? मुस्लिम सम्प्रदाय में शिया और सुन्नी में भी यही तर्क, इसाईओं में भी यही कथोलिक,प्रोटेसटेंट इत्यादि में यही तर्क ऐसा क्यों प्रभु?
और तो और है ईश्वर हिन्दू धर्म के चार और उपजातियां बन गयीं,ब्राहमण, क्षत्रिय, वैश्य और शुद्र, इंसानों ने तेरी इस दुनिया में
है मालिक,यह हिन्दू धर्म में उपजातियां बना कर,ब्राहमण को सर्वश्रेष्ठ,फिर क्षत्रिय,वैश्य को क्रमतर श्रेष्ठता के आधार पर वरिनिकृत किया है और शुद्रो को निकृष्ट, और कहीं,कहीं तो शूद्रों से ऐसा व्यवहार कि नित्य परतिदिन की आवश्यकता जैसे कुँए का पानी सार्वजानिक कुओं से नहीं ले सकतें,उनसे छूना दोष है, ऐसा क्यों प्रभु,जब सब की आत्मा एक हैं,सब आपकी संतान है,तो यह भेदभाव कैसा है ईश्वर?
इस सृष्टि में,आपने प्राकर्तिक आपदाएं क्यों बनाई,जिसमें नीरीह,भोले,भाले जीवों की मृत्यु हो जाती है,और उनके संगी,साथी कुछ नहीं कर पातें हैं , सिवाय रोने बिलखने के, ऐसा क्यों है परमात्मा ?
और तो और सबके हिर्दय में,मृत्यु का ऐसा भय इस कारण बैठा दिया है, मृत्यु के ऐसी अनजानी मंजिल बना दी जहाँ से कभी कोई लौट के नहीं आता है, और यह भय सबमें व्याप्त कर दिया ऐसा क्यों है परमात्मा ?
क्या आपने इसीलिए सृष्टि की रचना की नीली छत्री वाले ?