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मंगलवार, मार्च 02, 2010

शेर क्यों और भी जीव विलुप्त होते जा रहे हैं |

आज कल दूरदर्शन पर विभिन सेलिब्रिटीयों के द्वारा सन्देश दिया जा रहा है, हमारे देश में केवल 1411 शेर रह गएँ हैं, परन्तु इसके अतिरिक्त और भी वोह जीव साधारनतया बाग,बगीचों और घरों में पाए जाते थे,वोह भी तो लुप्तप्राय: होते जा रहें हैं,
http://www.impactlab.com/wp-content/uploads/2009/12/Bees-5432145.jpg

पहचाना आपने,जी हाँ फूल से रस चूसती मधुमक्खी, जो फूलों से मकरंद चूस कर,शहद में परिवर्तित करती हैं, इन मधुमक्खियों के छत्ते पेड़ो पर लटकते दिखाई दे जाते थे, और जिन छत्तों पर यह मधुमक्खियाँ पर दिखाईं देतीं थी, अब कहाँ यह शेहद के छत्ते और यह मधुमखियाँ कहाँ दृष्टिगोचर होतीं हैं ?,अब तो यह नजारा देखना दुर्लभ सा हो गया है, धरती पर तेजी से बनते घरों के कारण,इनका आशियाना बाग़,बगीचें छिनते जा रहें हैं,और  यह शेहद की मक्खियाँ लुप्तप्राय: होतीं जा रहीं हैं |


http://freeartisticphotos.com/wp-content/uploads/2009/07/free-close-up-photo-butterfly-and-flowers.jpg
  अब आते हैं,रंगबिरंगी, मनमोहक बागों में,फूलों का रस चूसती हुईं,तितलियों पर, बच्चों को यह रंगबिरंगी  तितलियाँ इतनी भाती थीं, कि इनकों पकड़ने के लिए इनका पीछा करतें थे, और जब यह तितलियाँ पकड़ में आ जातीं थीं तो ,इनके रंगबिरंगे रंग हाथों की उँगलियों पर लग जातें थें, इनका भी आशियाना बाग़,बगीचें ही थे, लोगों के अपना आशियाना बनाने के स्थान,पर इन रंगबिरंगी तितलियों का आशियाना बहुत हद तक छिन लिया हैं |
 यह नन्हे,नन्हे जीव उड़ते हुए, एक फूल पर बैठ कर और फिर दूसरे फूल पर बैठ कर, फूलों के परागन में सहायता करतें हैं,और इस प्रकार से फूलों से लदी हुई बगिया के निर्माण में सहायक होतें हैं,परन्तु यह भी लुप्त होने की ओर अग्रसर हो रहें हैं |

http://upload.wikimedia.org/wikipedia/commons/3/32/House_sparrow04.jpg
   इस नन्ही सी चिड़िया से कौन परिचित नहीं होगा, हमारे,आपके घरों में लटकी हुई फोटों के पीछे यह अपना घोंसला बनाती थी, लेकिन अब तो गगनचुम्बी इमारतों का निर्माण होने लगा हैं, यह चिड़ियाँ तो धारा पर बसे हुए घरों में अधिक स्थान होने के कारण,यह उन घरों में अपना घोसला बनातीं थीं ,परन्तु गगनचुम्बी इमारतों में इनकों घोस्लां बनाना कठिन हैं, इनका भी आशियाना छिनता जा रहा है, यह चिड़िया बारिश के जमीन पर पड़े हुए पानी में नहाते हुयें दिखाई दे जातीं थी,पर अब कहाँ वोह नजारा देखने को मिलता है ?

  आज कल प्रक्रति का सफाई कर्मचारी यानि कि गिद्ध जो मरे हुए जीव,जंतुओं को कहा,कहा करके सफाई को अंजाम देते हैं,वोह भी तो लुप्त होते जा रहें हैं, केवल शेरो की संख्यां तो कम हो गयीं हैं,परन्तु यह जीव जंतु भी तो लुप्त होने के कगार की ओर अग्रसर हो रहें हैं |
 केवल शेर क्यों इन जीव,जंतुओं का सरंक्षण दो

6 टिप्‍पणियां:

Mithilesh dubey ने कहा…

आपकी चिन्ता जायज और सार्थक भी है ।

Arvind Mishra ने कहा…

हाँ सही कह रहे हैं आप -हमारे सरंक्षण कार्यक्रम ऐसे ही एकांगी होते गए हैं और वन्य जीवन ख़तम होता जा रहा है !

Suman ने कहा…

nice

Neha ने कहा…

sher lupt ho rahe hai...aur anya kai prani bhi..waise aapne abhi jinka yahaan jikra kiya hai...unhe main aaj bhi mumbai me rahte huye roz dekh pati hoon..so mere liye ye to lupt nahi hain...lekin aapki baton me ye sachai jaroor hai ki kai anya prani bhi lupt ho rahe hain.....aaj agar sheron ke sanrakshan ki baat ki ja rahi hai to isme kya burai hai..?..aaj hum usme yatha sambhav bhagidari nibhaen to aage anya jeevon ki or bhi zaroor dhyaan diya jayega...agar meri kisi bhi baat se thes lage to maaf kijiyega..

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" ने कहा…

आपका कहना बिल्कुल दुरूस्त है...कि इस प्रकार के संरक्षण कार्यक्रमों को चलाने का क्या उदेश्य रह जाता है...आज शेर लुप्त हो रहें हैं तो लगे चिल्लाने...कल किसी ओर जीव जन्तु के बारे में चिल्लाने लगेंगें....क्यो नहीं हम प्रकृ्ति तथा उसके जीवों के रक्षार्थ एक सामूहिक प्रयास करते।

vinay ने कहा…

नेहा जी मुझे वुरा नहीं लगा,हाँ आपकी बात ठीक है,आप मुम्बई में रोज इन जीवों को देखतीं हैं,और इन प्राणीयों को में भी यहाँ गाजियाबाद में देखता हूँ,परन्तु इन प्राणीयों की भी संख्या कम होती जा रही है,जैसे यह पहले बहुतयात में दिखते थे,परन्तु अब नहीं ।