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मंगलवार, सितंबर 01, 2009

भृगु सहिंता के बारे मे मेरी अल्प जानकारी

संगीता जी के दो लेख भृगु सहिंता के बारे देखे, तो सोचा की मै, तो सोचा मै अपनी इस ग्रन्थ के बारे मैं अपनी अल्प जानकारी दे दूँ , भृगु सहिंता भृगु का निर्माण भृगु ऋषि ने किया था, और इस सन्दर्भ मे भृगु ऋषि के बारे मे बता दूँ, एक बार भृगु ऋषि के मन मैं आया, कि देखूं, कौन सा देवता जल्दी क्रोधित हो जाता,है,भृगु ऋषि ने,सभी पर अपने चरणों का प्रहार किया, इसी क्रम मे भृगु ऋषि ने विष्णु भगवान के सीने में भी अपने चरणों से प्रहार किया, तो भगवान विष्णु ने उनके चरण पकड़ लिए और बोले कि मेरे कठोर शरीर से आप के चरणों को चोट तो नही,पहुँची, और भगवान विष्णु के सीने पर भृगु ऋषि के चरणों की छाप बन गयी, इन्ही भृगु ऋषि ने भृगु सहिंता का निर्माण किया है।
जो मुझे अच्छे प्रकार से ज्ञात है, एक भृगु सहिंता पंजाब के होशियारपुर में है, और इसकी केवल तीन हस्तलिखित प्रतिलिपिया हैं, और भृगु सहिंता के अधिकतर पृष्ठ फट गये हैं, येही भृगु सहिंता भूत,भविष्य और वर्तमान का ज्ञान देती है, होशियारपुर के अतिरिक्त मुझे नहीं मालूम शेष प्रतिलिपिया कहा है।
भृगु सहिंता जो पंजाब के होशियारपुर में,उसकी जानकारी दूरदर्शन पर भी दी गयी थी, दूर्दाशन मे ही बताया गया था की इसको देखने बाद कुछ नियम है जिनका अनुसरण करना आवशयक है, यह तो नही बताया गया था यह क्या नियम हैं, परन्तु यह बताया गया था,नियमो का अनुसरण ना करने वालो का परिणाम बुरा होता है।
मैंने अपनी टिप्पणी मे लिखा था, की भृगु सहिंता पंजाब के होशियारपुर में है, और मेरे एक परिचित देख कर भी आए थे, और वोह कोई और नहीं, बल्कि हमारे नजदीकी रिश्तेदार थे, अब यह तो ज्ञात नहीं, की यह केवल सयोंग था,अथवा नहीं, हम लोग उन दिनों मोदीनगर में थे, दिल्ली से उनके पिता जी का फ़ोन आया था, और हम लोगो को एक चिकत्सालय में तुरन्त बुलाया था।
जब हम लोग उस चिकत्सालय में पहुंचे तो वोह हमारे रिश्तेदार मरनासन अवस्था में, बेड पर लेटे हुए थे,मरनासन अवस्था में क्या बल्कि उनकी सांसे मशीनों के द्वारा चल रही थी, वोह २५ दिसम्बर का ही काला दिन था, वोह दिल्ली में अपने कार्यालय में गए थे,और वही उनको ब्रेन हेमरेज हो गया था, बाद में उनकी पत्नी को उसी इंडियन आयल में नौकरी मिल गई थी, उनके तीन बच्चे हैं,जो अब स्थापित हो चुके हैं, उनके देहावसान के बाद उनके पर्स में से कुछ कागज मिले थे,जिन पर पूर्ण विवरण लिखा हुआ था।
हमारे ऋषि,मुनियों का ज्ञान तो सर्वविदित है, पता नहीं सत्य है,कि नहीं यह भी सुनने में आया है, कि भृगु सहिंता वालो को यह भी ज्ञात होता है,अमुक दिन अमुक व्यक्ति अपना भविष्य देखने को आएगा।

4 टिप्‍पणियां:

फ़िरदौस ख़ान ने कहा…

उपयोगी जानकारी है...

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" ने कहा…

जी हाँ सही कहा आपने!! अपना भविष्य जानने के इच्छुक जो व्यक्ति वहाँ पहुंचते हैं,उन सब को प्रात:काल एक निश्चित समय पर मन्दिर के जैसे एक बडे से हाल कमरे में बिठा दिया जाता है। फिर भृ्गु संहिता का पूजन,आरती इत्यादि करके उसका कोई भी एक पृ्ष्ठ खोल कर पढा जाता है.....जिसमें से पढकर उन्ही का कोई एक व्यक्ति बताता है कि आज अमुक तिथि,अमुक् वार के दिन इस समय यहाँ अमुक अमुक नाम के व्यक्ति अपना भविष्यफल जानने को उपस्थित हुए हैं। फिर बाद में अपनी अपनी बारी अनुसार उन सब का व्यक्तिगत भविष्यफल एक अलग कमरे में बुलाकर सुनाया जाता है। आप हैरान हो जाएंगे ये जानकर कि आप के बिना बताए आपके एक या दो पारिवारिक सदस्यों के नाम तक वो बता देते हैं,वो भी सिर्फ नामाक्षर नहीं बल्कि पूरा का पूरा नाम। ये सिर्फ सुनी सुनाई बातें नहीं है,बल्कि पूरी तरह से सच है। यदि कोई चाहे तो जाकर परख कर सकता है।
भृ्गु संहिता की दूसरी प्रतिलिपी यहाँ पंजाब में ही सुल्तानपुर लोधी नामक जगह पर रखी है। दोनों को ही मैं खुद अपनी आखों से देख चुका हूँ।

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन ने कहा…

रोमांचक घटना. संसार में इतने रहस्य भरे पड़े हैं की किस घटना के पीछे कितना नियम है और कितना संयोग यह आसानी से कहा नहीं जा सकता है. वैसे नश्वर संसार में शायद इस बात से कोई ख़ास फर्क भी नहीं पड़ता की क्योंकि नियम और संयोग भी तो नश्वर ही हैं. भृगु संहिता की एक प्राचीन प्रतिलिपि दिल्ली के एक परिवार के पास भी है.

krishnakant ने कहा…

mai pichhale 1 varsh se hoshiyarpur ke bhrigusnhita wale pandito se meri aur mere pariwar ki janmakundali khojne ka nivedan kar raha hu. lekin ab tak ek ka bhi janmakundali nahi mila hai.kripaya bataye isake bare me sahi jankari kaha se mil sakata hai? Krishna Kant Chandra Chhattisgarh