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शनिवार, जुलाई 17, 2010

महिलओं के नामो से परेशान हुआ

पत्नी ने पूछा क्या कर रहे हो ?
मैंने कहा अपनी कविता के साथ हूँ 
तमतमा के बोली पत्नी यह कविता कौन है ?
उत्तर था मेरा यह तो मेरी रचना है |
अब वोह बोली अभी तो कविता के साथ थे ||
यह रचना कहाँ से आ गयी |
में बोला अरे में प्रगति की ओर जा रहा हूँ |
फिर तो वोह बोली अभी तो कविता,रचना कर रहे थे?
क्या इनसे मन नहीं भरा जो चल दिए प्रगति की ओर ||
अब मेरा उत्तर था अरे में काव्य की बात कर रहा हूँ |
गुस्से में तो थीं ही श्रीमती जी काव्य को काव्या सुना |
बोली फूटी किस्मत मेरी अब यह काव्या कहाँ से आ गयी ||
जब मैंने अंग्रेजी में कहा पोइट्री तो श्रीमती शांत हुईं|
 
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5 टिप्‍पणियां:

संगीता पुरी ने कहा…

चलिए अंग्रेजी की पोएट्री से शांत तो हो गयी .. बढिया लिखा है !!

Jandunia ने कहा…

शानदार पोस्ट

डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर ने कहा…

आपकी श्रीमती जी है नहीं पूरा देश परेशां है..........
एकता, सीमा-रेखा के विवाद से.
वार्ता करनी है शांति की
जरूरत है अच्छी भावना की.
पता नहीं कब सपना सच होगा?
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बढ़िया है.....बधाई
जय हिन्द, जय बुन्देलखण्ड

boletobindas ने कहा…

अंग्रेजी गजब है। पोएट्री को पोएट्री ही समझी.....बाकी सब ठीक है।

Akhtar Khan Akela ने कहा…

jnaab mzaa aa gyaa mhilaaon ke naam se aap hi nhin sbhi preshaan hen aap to kevl mhilaaon ke naamon e hi prehaan hen yhaan to hm mhilaa se preshaan he bhut khub prstutui he bdhaayi ho . akhtar khan akela kota rajsthan