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गुरुवार, मार्च 18, 2010

माँ की दुर्गा स्तुति पुस्तक का चमत्कार

यह मेरे साथ हुई सत्य घटना है, उन दिनों में इन्जिनीरिंग के तीसरे वर्ष की पड़ाइ कर रहा था, और इन्जिनीरिंग कोलेज के छात्रावास में रह रहा था |
  पहले दो वर्ष यानि की चार सेमेस्टर उतीर्ण कर चुका था, हर छे महीने के बाद सेमस्टर की परीक्षा होती थी, दो सेमेस्टर की परीक्षा उतीर्ण करने के बाद,अगले वर्ष में दाखिला मिलता है, तीसरे वर्ष का पहला सेमेस्टर पास कर चुका था, और तीसरे वर्ष के दूसरे सेमेस्टर की परीक्षा देकर,परीक्षा परिणाम की प्रतीक्षा कर रहा था, परीक्षा परिणाम आने पर मैंने अपने को अनूतिर्ण पाया, हर दो सेमेस्टर के बाद अवकाश हो जाता था और हम लोग अपने,अपने घरो को आ जाते थे, अभी परिपक्वता तो आई नहीं थी, इस कारण घर में अपने को अनुतीर्ण बताने पर मेरे साथ क्या व्यवहार होगा,इस डर के कारण में अपने एक सीनियर जो कि नौकरी करता था,उसके घर आ गया था, लेकिन कितने दिन उसके घर में रहता,आना तो लौट के घर में ही था,सो में अपने घर आ गया |
 यहाँ पर एक बात और बता दूं,मेरी लौकिक माँ हमारे किसी नजदीकी रिश्तेदार जो कि ज्योतिष भी थे,उनसे पूछती रहती थी, कि मेरा बेटा नियत समय में ही अपनी इन्जिनीरिंग की पड़ाइ कर के आ जायगा,तो वोह सदा हाँ ही कहा करते थे, इस बात को यहीं छोड़ते हैं |
होता ऐसे था कि, कुल प्राप्त अंक 50 प्रतिशत से ऊपर होने चाहिए थे, मेरे अंक उस समय 50 प्रतिशत से ऊपर नहीं थे, और मेरे तीन विषय में भी कुल प्राप्तांक में भी 50 प्रतिशत से ऊपर नहीं थे,और 50  परतिशत से कम अंक किसी भी विषय में पाने पर, उस विषय में भी अनूतिर्ण माना जाता था, और तीन विषय में अनुतीर्ण छात्र को अनूतिर्ण माना जाता था, यही मेरे साथ हुआ था,घर तो आ ही चुका था,और मुझे बताना पड़ा कि में, तीसरे वर्ष में अनूतिर्ण हो गया |
 मेरी माँ तो तब नहा कर के स्वछ वस्त्र पहन कर,दुर्गा स्तुति की पुस्तक हाथ में लेकर मन में मेरे पास होने की कामना लेकर बैठ गयीं |
 अब पाठ करते,करते पंद्रह दिन हो गये थे, और जगजननी माँ की कृपा से यह चमत्कार होता है, कि पंजाब विश्वविद्यालय में, यह नियम बदलने के लिए आन्दोलन हो जाता है, जो भी छात्र 50 प्रतिशत से कम किसी विषय में प्राप्त करे उसको अनूतिर्ण ना समझा जाये, चाहे कुल प्राप्तांक कुछ भी हों |
जब मेरी माँ को पाठ करते,करते इक्कीसवां दिन हो गया,तो एक और चमत्कार हुआ कि, पंजाब विश्विद्यालय का वर्षो से चला आ रहा नियम बदल गया,और में दोबारा परीक्षा दिए हुए उतीर्ण हो गया,अब मेरा भी उत्साह बड़ा मैंने अपनी उत्तर पुस्तिका की दोबारा जाँच करवाई ,जो कि इन्जिनीरिंग कोलेजो में संभव नहीं था, परन्तु जगजननी माँ की कृपा से मेरे प्राप्तांक उन विषयों में 60 प्रतिशत से ऊपर निकले, तो निकले, पर कुल प्राप्तांक भी 60 प्रतिशत से ऊपर थे |
 अब इसको क्या कहा जाये,सयोंग या जगतमाता की कृपा में तो माँ की कृपा ही समझता हूँ,और उस समय अनायास मेरे मुख से श्रद्धावश निकला,जय माता की |

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