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शुक्रवार, सितंबर 24, 2010

कोमनवेल्थ गेम्स की क्यों की तय्यारी की क्यों दुर्दशा कर दी |

3 अक्टोबर  से कोमन वेल्थ गेम्स को उद्द घाटन होना है, और अभी तक एक प्रातिशिष्ट समारहो,जिसमें देश विदेश से आने वाले खिलाड़ी हैं,अपने भारत की क्या छबी लेकर जायेंगे?,बहुत से देशो ने तो अपने खिलाड़ियों की रवानगी,कुछ समय के लिए टाल दी, में समाचार पत्रों  में,प्रकशित खबरों के बारें में,ना के बराबर लिखता हूँ, परन्तु नित,नित कोमनवेल्थ के समाचारों से आहात हो गया हूँ, एक बार मैंने अपने इसी ब्लॉग में,एक लेख लिखा था, जिसका आशय यही था,क्या विरोधी पार्टियाँ एक दूसरे पर,आरोप प्रत्यारोप लगाने की बजाये,मिल कर काम नहीं कर सकतीं, और यही कोमनवेल्थ गेम्स की तय्यारी में दृष्टिगोचर हुआ है, अगर देश की प्रतिष्ठा को लेकर,यह लोग मिल जुल कर काम करतें,तो विदेशी आने वाले मेहमानों की छेट्टाकशी सुनने को ना मिलती, जैसा किसी खेल सयोंजक ने कहा है,की कोरिया में वोह गएँ थे,और सब कोरिया की पार्टियों ने,आपसी मतभेद भुला कर मिल जुल कर खेल का प्रबंध किया था, जब कश्मीर की जवलन्त समस्या,उग्रबाद के लिए,सब पार्टी के लोग मिल जुल कर गये थे, जब यह लोग देश के आन्तरिक मसले को मिल,जुल कर सुलझाने का प्र्यतन कर सकते हैं, तो देश के सम्मान का इनके लिए कोई,मूल्य नहीं हैं ? कुछ समय पहले भी मैंने,अपने एक लेख में यह सवाल उठाया था,कोमन वेल्थ गेम,इस प्रकार की अव्यवस्था में कैसे होंगे?
 अगर प्रश्न यह है,अत्यधिक वर्षा के कारण प्रबंध नहीं हो पाया,तो चीन ने इसी वर्षा ऋतू में,एशिया में होने वाले खेल जो नवम्बर में होने हैं,उसके लिए कैसे उचित प्रबंध कर लियें हैं ?
 जब कोई विदेशी कहता हैं, कि गंदगी के कारण खेल गाँव रहने के लिए,उचित नहीं हैं,तो कहा जाता हैं,पश्चिम और हमारे देश की सफाई के मापदंड अलग है, अगर कुछ भी गेरेत हैं,तो उन विदेशियों के मापदंड के हिसाब से बनाते खेलगाँव , यह कितना बड़ा अपमान हैं,इंग्लॅण्ड की टीम,खेलगांव में ना रह कर होटल में रह रही है, भारतवर्ष तो अतिथतियों के स्वागत के लिए परसिद्ध है, यह कैसा स्वागत है ?
जामा मस्जिद के पास कोई,अंधाधुन्द गोलियां चला कर चला जाता है, और ना ही सी.सी.टी.वी केमरे हैं,और ना ही मेटल डिटेक्टर काम कर रहें हैं, ताइवान के दो पर्यटक गोलियों के शिकार हो जातें हैं,और कुछ पता नहीं चलता,जब देश में विदेशिओं का समूह,आ कर रूकने को है,तब यह परिस्थति है,इन लोगों से बेहतर तो वोह ऑटो वाला है,जिसने अपनी जान की परवाह ना  करते हुए, उन आतंकवादियों को पत्थर से मारने का प्र्यतन किया,सीखों आम नागरिक से,और वोह आतंकवादी भाग गये  |
जवाहर लाल नेहरु स्टेडियम के सामने बना,फूट ओवर ब्रिज, इस समारोह के कुछ दिन पहले ही,गिर जाता है,अरे सबक लो मेट्रो ट्रेन का जाल बिछाने वाले अधिकारीयों से,दिल्ली के अधिकांश भागों में,जिनोहने मेट्रो का जाल विछा दिया,और कुछ ही छुट,पुट घटना हुई थी, और जिस पर मेट्रो के मुख्य अधिकारी ने उसकी जिम्मेवारी लेने के कारण,अपना त्याग पत्र दे दिया था,यह होता नेतिक मूल्य ,सीखों इन अधिकारीयों से |
ऐसा नासूर ना दो जो घाव बन जाये 

2 टिप्‍पणियां:

गजेन्द्र सिंह ने कहा…

बहुत बढ़िया प्रस्तुति .......

क्या आप के बेटे के पास भी है सच्चे दोस्त ????

कुमार राधारमण ने कहा…

आयोजन की बोली में शामिल होते समय जो उत्साह था,बाद में जाता रहा। सब चलता है की सोच ने इस बार कबाड़ा कर दिया।