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बुधवार, फ़रवरी 17, 2010

बच्चो को रियलटी शो में क्यों लाया जा रहा है |

आज कल दूरदर्शन अनेकों प्रकार के चेनल हैं,भक्ति के लिए संस्कार और आस्था जैसे चेनल, ख़बरों के लिए आजतक,इंडिया टी.वी और भी अनेकों प्रकार के चेनल, मनोरंजन के लिए कलर,सोनी,जी टी.वी इत्यादि अनेकों चेनल,अंग्रेजी भाषा के अनेकों चेनल,चलचित्रों के लिए अनेकों चेनल, मनोरंजन वाले चेनलो पर धाराबाहिकों और रियल्टी शो दिखाने वाले अनेकों चेनल हैं, रिअलिटी शो आते,जाते रहतें हैं, जिसमें सभी उम्र के लोगों के लिए मनोरंजन होता है, और इन रियलटी शो में भी भाग लेने वाले भी प्राय: बच्चो से लेकर व्यस्क लोग होतें हैं, धराबहिकों में भी बच्चो से लेकर व्यस्क और प्रोड़ लोग होतें हैं |
  रिअलिटी शो में, परतिस्पर्धा होती तो है ही ,और उनको जज करने वाले जज होतें हैं, और रियल्टी शो में भाग लेने वालों को जजों के द्वारा कमेंट्स दिए जातें हैं,तत्पश्चात मार्क्स दिए जातें हैं |
 यह चेनल टी.आर.पी बढाने के लिए अनेकों प्रयत्न करतें हैं, इन चेनलो में टी.आर.पी बढाने की होड़ सी लगी,रहती है, यह चेनल वाले यह नहीं सोचते कि बच्चों के लिए रियल्टी शो बनाने से उनके कोमल मन पर क्या प्रभाव पड़ेगा, बस उनको तो अपनी टी.आर.पी कि चिंता है, धराबहिकों में तो बच्चों के द्वारा किया हुआ अभिनय तो फिर भी एक सीमा तक उचित है, इसमें बच्चो की कई,कई घंटो की रिहर्सल के कारण इन बच्चों की पडाई की हानि तो होती है,परन्तु उस पडाई की हानि को  तो जैसे,तैसे यह बच्चे पूरी कर लेते हैं, परन्तु रियल्टी शो में जो बच्चे भाग लेते हैं, बहुत बारउन बच्चों को  जजों के कठोर शब्द सुनने पडतें हैं,और बच्चों का मन तो फूल सा कोमल होता है,और यह जजों के कठोर शब्द बहुत बार इन बच्चों के मन पर ऐसा प्रभाव डालता है, इनका फूल सा मन मुरझा जाता है, एक रियल्टी शो में एक बच्ची को जज के कठोर शब्द सुन कर पक्षाघात हो गया था,और एक दूसरी बच्ची ने जज के कठोर शब्द सुन कर आत्महत्या को गले लगा लिया था, धरबाहिकों में तो नंबर नहीं मिलते ना ही जजों के कोमेंट्स होतें है,वहाँ तो केवल अभिनय ही होता है,इसमें भी घंटो का रियाज़ करना पड़ता है,परन्तु यहाँ बच्चों के मनोभावों पर वोह प्रभाव नहीं पड़ता जो कि रियल्टी शो में पड़ता है, रियल्टी शो के लिए घंटो का रियाज़ और परिणाम में अंक पाना और जजों के कठोर कोमेंट्स सुनना बच्चो को झकझोर देता है, हाँ कोमेंट्स अच्छे,बुरे सब प्रकार के होतें है, बच्चों में इतनी परिवक्ता नहीं होती कि वोह कठोर स्थितयों का सामना कर पायें, और हरने के बाद या कठोर कोमेंट्स सुनने के बाद यह बच्चे टूट जातें हैं,और घातक कदम उठा लेतें हैं |
  दूसरी ओर इन बच्चों पर स्टारडम का नशा छा जाता है,जिससे इनका बहार निकलना कठिन हो जाता है, इस कारण अपनी पडाई पर यह बच्चे उचित ध्यान नहीं दे पाते, बच्चो के लिए ऐसे कार्यक्रम तो होने चाहिए,जिसमें इन बच्चों की प्रतिभा तो उजागर हो परन्तु उसमें परतिस्पर्धा ना हो, ना अंको का सिलसिला |
  टी.आर.पी बढाने की होड़ में कब बंद होगा बच्चों के साथ इस प्रकार का  खिलवाड़

1 टिप्पणी:

Aashee's world ने कहा…

uncle,
i agree wt u,
u know, im also a bharatnatyam dancer but i dont like tv show r etc.